मॉवलिननॉन्ग गाँव (मेघालय)

असीम प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत, भारत के उत्तर-पूर्व के 8 राज्यों में से एक राज्य है, मेघालय | मेघालय अर्थात “बादलों का आश्रय (निवास)”| आसाम घाटी और बांग्लादेश को जोड़ने वाले इस राज्य में संस्कृति, प्रकृति एवं नवीनता का समागम अकल्पनीय है |

अनुपम सौंदर्य का धनी यह प्रदेश जैंतिया, खासी और गारो जनजाति समुदायों (tribes) का निवास स्थान है |

मेघालय का गौरव

आपने कभी पहाड़ों पर तितलियों को उड़ते देखा है ? अत्यंत सुन्दर रंगो से सुसज्जित, चमकती हुई कितनी आकर्षक लगती हैं | यह उपमा मैं देती हूँ, मेघालय के एक छोटे से गाँव ” मॉवलिननॉन्ग ” को | यहाँ प्रकृति हर कोने में विराजमान है तथा इसे भगवान का बगीचा (God’s Own Garden) की उपाधि भी दी गयी है |

मेघालय की राजधानी शिलांग से अनुमानतः 79 किमी दूर यह गाँव प्रदेश के पूर्व खासी हिल्स में बसा है |

Credit : Prasun Bharadwaj

मॉवलिननॉन्ग गाँव को, वर्ष 2022 के Outlook Traveler’s Award के Best Eco Tourism Destination के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है | इस गाँव में प्रकृति और यहाँ के निवासियों का बड़ा ही दिलचस्प रिश्ता है | दोनों ही एक-दूसरे का सम्मान करते हैं | मॉवलिननॉन्ग गाँव की प्रशंसा में इसे “हरित स्वर्ग” कहा जाये तो अतिशयोक्ति न होगी | वर्ष के 365 दिन हरीतिमा की चादर ओढ़े, विभिन्न रंगों के पुष्पों की लड़ियों से सजा यह गाँव एक सुरम्य सी तस्वीर प्रस्तुत करता है | प्रायः हर घर के बाहर, सड़कों के किनारे और चौराहों पर हरियाली और सम्मोहक पुष्पगुच्छ दिखते हैं |

पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली

वर्ष 2003 में Discovery India Magazine द्वारा एशिया का स्वच्छतम गाँव का सम्मान प्राप्त करने वाले मॉवलिननॉन्ग के निवासी साफ-सफाई के लिए एक योजनाबद्ध प्रक्रिया प्रयोग में लाते हैं | मात्र 4 वर्ष की आयु से बच्चों को स्वच्छता के प्रति सजग एवं उसके महत्त्व के विषय पर शिक्षित किया जाता है | 77 परिवार यानि अनुमानतः 500 लोगों की जनसंख्या वाले इस गाँव में पर्यावरण के अनुकूल (eco-friendly) जीवन शैली का अनुसरण किया जाता है | बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक, प्रत्येक व्यक्ति का स्वच्छता बनाये रखने में अपना योगदान देना अनिवार्य है | गाँव को स्वच्छ रखने के लिए नियम बनाये गए हैं जिनका पालन वहाँ के निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी करना आवश्यक है |

 

Credit : ANKAN

यहां प्लास्टिक की थैलियों (polythene bags) पर प्रतिबन्ध है | गाँव की सड़कें हमेशा साफ़ रहती हैं और इनके दोनों ओर कतार में वृक्ष लगे हैं | इसके अतिरिक्ति कई स्थानों पर स्वच्छता का निर्देश देते बोर्ड लगे हैं | घरों के बाहर , प्रत्येक गली एवं रास्तों पर बांस (Bamboo) के बने कूड़ेदान (dustbins) लगाए गए हैं | गाँव की वायु दूषित न हो इसलिए धूम्रपान करना वर्जित है | सोलर यन्त्र (Solar system) द्वारा विद्युत् उत्पादन तथा वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) को भी विशेष महत्त्व दिया जाता है |

जीवंत पुल

एशिया के स्वच्छतम गाँव के अतिरिक्त प्रकृति के अद्भुत सहयोग का उदहारण भी यहाँ उपस्थित है, जीवंत पुल (living root bridge) के रूप में | ये रबड़ के वृक्षों की जड़ों से बुने हुए प्रतीत होते हैं और वर्ष दर वर्ष पुराने एवं मज़बूत होते जा रहे हैं | इन जीवंत पुलों को “यूनेस्को”(UNESCO) ने विश्व की धरोहर के रूप में नामित किया है | नदियों का आईने के समान साफ़ जल जिसमे अपने प्रतिबिम्ब के साथ-साथ उसकी गहराई में छिपा कण-कण झलकता है | 

जीवंत पुल (living root bridge)
Credit : Madhumita Das
उमंगोट नदी
Credit : Kartikeya Agrawal

शत-प्रतिशत साक्षरता वाले मॉवलिननॉन्ग गाँव के निवासियों का संपूर्ण जीवन एक प्रेरणा है | इनके लिए स्वच्छता केवल कर्त्तव्य ही नहीं अपितु एक संस्कृति है जो पीढ़ियों से चली आ रही है | हम उनके श्रम एवं प्रयासों का सम्मान करते हैं | निश्चित ही, मॉवलिननॉन्ग निवासियों के लिए प्रकृति उनके जीवन का आधार और एक अनमोल वरदान है |

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